
पिछले कुछ सालों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पहले लोग सिर्फ डिग्री के पीछे भागते थे, लेकिन अब फोकस धीरे-धीरे स्किल पर शिफ्ट हो रहा है।
आज कल छात्र ग्रेजुएशन के साथ-साथ ऑनलाइन कोर्स भी कर रहे हैं – कोडिंग, डिजिटल मार्केटिंग, ग्राफिक डिजाइन, एआई टूल्स, वीडियो एडिटिंग और डेटा एनालिसिस जैसे फील्ड्स में डिमांड तेजी से बढ़ रही है।
रिक्रूटर्स का कहना है कि सिर्फ डिग्री देख कर हायरिंग नहीं होती। व्यावहारिक ज्ञान और वास्तविक परियोजनाओं का अनुभव ज्यादा मायने रखता है। इसी वजह से इंटर्नशिप, फ्रीलांसिंग और सर्टिफिकेशन कोर्स का चलन बढ़ रहा है।
इसका मतलब ये नहीं कि डिग्री का महत्व ख़त्म हो गया है। डिग्री फाउंडेशन देती है, लेकिन स्किल करियर को स्पीड देती है।
👉आज का सवाल ये है:
क्या भविष्य में “डिग्री + कौशल” का संयोजन ही सफलता का सूत्र बनेगा?
